DELHI: पुलिस नहीं ले सकी आरोपी के खिलाफ सबूत, अदालत को करना पड़ा बरी
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बता दें, साल 2014 में ललित के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था. ललित के वकील मनीश भदौरिया ने अदालत का रुख करते हुए कहा था कि ललित के खिलाफ कोई सबूत नहीं है. ना ही कोई सीसीटीवी जो इस बात का सबूत देती हो कि ललित ने लूटपाट करने की कोशिश की. वहीं, उन्होंने ये भी कहा कि मामले में ललित को गिरफ्तार किए जाने पर भी कई तरह के सवाल उठते हैं.

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में एक शख्स पर ज्वैलरी की दुकान में लूटपाट की कोशिश के आरोपों को अदालत ने सात साल साल बाद बरी कर दिया है. दरअसल पुलिस शख्स के खिलाफ किसी भी प्रकार का सबूत पेश नहीं कर सकी जिसके बाद अदालत ने फैसला लेते हुए शख्स को बरी कर दिया.

महानगर दंडाधिकारी नितीश कुमार शर्मा ने 28 साल के ललित भदानी पर लगे सभी आरोपों को दरकिनार करते हुए बरी कर दिया. बता दें, पुलिस मामले में ललित के खिलाफ किसी प्रकार का सबूत नहीं जुटा सकी. जिसके बाद अदानत ने कहा कि ललित भदानी पर कही से भी सेक्शन 380, 457, 511 की धारा नहीं लगाई जा सकती इसलिए उन्हें इन सभी आरोपों से बरी किया जा रहा है.

साल 2014 का है मामला

ललित के लगी चोटों के चलते बरी आवेदन को नहीं बढ़ाया जा सका- आईओ

अदालत ने मामले की जांच कर रहे आईओ को पेश होने के आदेश दिया जिस पर आईओ ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें जांच में ललित के खिलाफ किसी प्रकार का सबूत नहीं मिला है. आईओ ने कहा कि ललित को बरी करने के लिए आवेदन को अब तक आगे नहीं बढ़ाया जा सका क्योंकि उसे कुछ चोटें आई थीं और वह बिस्तर पर पड़ा था.

ललित को साल 2014 में मिल गई थी बेल

बता दें, ललित साल 2014 में गिरफ्तार किया गया था. वहीं, उसी साल उसे मामले में बेल भी मिल गई थी. वहीं, शिकायकर्ता कृष्णा कुमार ने एफआईआर में कहा था कि, साल 2014 में उसने अपनी ज्वैलरी की दुकान का एक ओर का शट्टर को उठा देखा और कुछ लोग लूटपाट की कोशिश कर रहे थे.

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