घमासान के बीच आलाकमान को आखिरकार नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाना ही पड़ा
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पंजाब कांग्रेस में मचे घमासान के बीच आलाकमान को आखिरकार नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाना ही पड़ा. सिद्धू और कैप्टन खेमे के बीच जारी शह-मात के खेल में बाजी सिद्धू के हाथ लगी और आलाकमान ने उन्हें पंजाब में पार्टी की कमान सौंप दी. पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर सिद्धू की ताजपोशी के ऐलान के साथ ही पार्टी ने चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए हैं.

कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति में भी कैप्टन खेमे को दरकिनार कर दिया गया है. कैप्टन अमरिंदर सिंह के पसंदीदा विजय इंदर सिंगला, मनीष तिवारी, राज कुमार वेरका और अन्य नेताओं को वर्किंग प्रेसिडेंट तक नहीं बनाया गया. पार्टी ने संगत सिंह, सुखविंदर सिंह डैनी, पवन गोयल और कुलजीत सिंह नागरा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है.

यही नहीं, कांग्रेस की परंपरा रही है कि अध्यक्ष और अन्य सांगठनिक पदों पर नियुक्तियों से पहले प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जाती है. बैठक में कार्यकारिणी की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य नियुक्तियों को लेकर तमाम अधिकार कांग्रेस आलाकमान को दे दिए जाते हैं. अब तक ऐसा होता आ रहा था लेकिन इसबार यह औपचारिकता भी पूरी नहीं की गई.

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्र जारी कर इन नियुक्तियों का ऐलान किया है. पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष ने 19 जुलाई यानी सोमवार को प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है लेकिन इस बैठक से पहले ही नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का ऐलान पार्टी आलाकमान की ओर से कर दिया गया.

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