आखिर कब तक चलता रहेगा, लोगों की भावनाओं से खिलवाड़, कब समझेंगे दर्द

आखिर कब तक चलता रहेगा, लोगों की भावनाओं से खिलवाड़, कब समझेंगे दर्द

रेशम वर्मा कि रिपोर्ट


 अम्बिकापुर। संभाग के सबसे बड़े कोविड सेंटर मेडिकल काॅलेज अस्पताल में कोरोना से मरीज की मौत के बाद परिजनों को इसकी जानकारी देने में लापरवाही का मामला सामने आया है। मरीज का बेटा रविवार की रात का खाना भी अस्पताल में पहुंचाने गया लेकिन डयूटी में रहे कर्मचारियों ने बताने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने मरीज का खाना भी यह कह कर रखवा लिया कि कुछ समय बाद वार्ड में पहुंच जाएगा।

मरीज का मोबाइल बंद होने से बेटे की उससे बात नहीं हो पाई। घटना के बारे में तब पता चला जब बिश्रामपुर सतपता निवासी पुत्र सोमवार को नाश्ता लेकर आया और पीपीई किट पहनकर पिता को देखने आईसीयू में पहुंचा। वहां उसके पिता नहीं थे। पूछताछ में पता चला उसके पिता की रविवार को दोपहर में मौत हो गयी है। शव मरच्यूरी में रखवा दिया गया है। अस्पताल से इस तरह का जवाब मिलने से बेटा आवाक रह गया। उसने अस्पताल प्रबंधन पर मौत के बाद भी जानकारी न देने व शव को सुपुर्द करने में लापरवाही का आरोप लगाया है।

20 अप्रैल को कराया गया था भर्ती
मृतक के पुत्र ने बताया कि कोरोना से पिता की तबीयत खराब होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 20 अप्रैल को भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर बाद में डाॅक्टरों ने पिता को आईसीयू में भर्ती कर दिया। यहां इलाज चलता रहा। फोन पर भी उनसे बातचीत होती रही। बीच में जाकर उनसे मुलाकात भी करते थे। रविवार को दोपहर बाद उनका मोबाइल बंद बताने लगा था।

अब सीएमएचओ ने दिया बयान
सीएमएचओ ने कहा कि भर्ती मरीज को लेकर शासन से एक प्रोटोकॉल है। हम उसी के तहत शव परिजन को सौंपते हैं। इसमें एसडीएम से अनुमति लेनी पड़ती है। इसमें थोड़ा समय लगता है। मरीज की मौत होने पर भी परिजन को तुरंत सूचना दी जाती है, ताकि वे शव लेने दावा करें और हम आगे की कार्रवाई करें। इस मामले में सूचना देने में देरी कैसे हुई , इसकी जांच कराई जाएगी, कोई लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।

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