झारखंड मंत्री जगन्नाथ महतो 12वीं का रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म नहीं भर सके
 झारखंड मंत्री जगन्नाथ महतो 12वीं का रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म नहीं भर सके

बोकारो से शेखर की रिपोर्ट।


झारखंड के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो पिछले कुछ महीनों से मुंबई में अपना इलाज करवा रहे थे जिसके चलते बीमार के कारण झारखंड मंत्री जगन्नाथ महतो 12वीं का रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फार्म नहीं भर सके।
कोविड-19 महामारी के कारण केंद्र माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा कर दी गई है वही अन्य राज्यों में भी पानी की परीक्षा रद्द करने की मांग उठ रही है अगर इसी तरह पर पर झारखंड में भी 12वीं की परीक्षा रद्द होती है तो झारखंड के 12वीं के छात्रों के साथ यहां के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो जी बिना परीक्षा दिए 12वीं की परीक्षा पास कर जाते लेकिन ऐसा संभव नहीं है क्योंकि शिक्षा मंत्री अपनी बीमारी की वजह से 12वीं का रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फॉर्म नहीं भर सके आपको बताते जाएगी विगत कुछ महीनों से झारखंड के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महत्वपूर्ण और चेन्नई में है वह अपोलो अस्पताल में अपने से बड़ों के प्रत्यारोपण के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं 25 मई को उन्हें अस्पताल में छुट्टी दे दी गई है डॉक्टर की निगरानी में झारखंड के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो रहेंगे।

2019 में 12वीं की परीक्षा के लिए दाखिला लिए यही शिक्षा मंत्री ने:-

आपको बताते जाएं कि 2020 में शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने बोकारो जिले के नावाडीह में स्वयं द्वारा स्थापित देवी महतो स्मारक इंटर महाविद्यालय में इंटर में अपना नामकरण कराया था कॉलेज के प्राचार्य दिनेश प्रसाद ने बताया कि शिक्षा मंत्री को इस वर्ष इंटर की परीक्षा देनी थी लेकिन बीमारी की वजह से नाथूपुरा रजिस्ट्रेशन फॉर्म भर सके और ना ही पर परीक्षा फॉर्म इस कारण वह परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे अगर मंत्री ने यह फॉर्म भर दिए होते तो परीक्षा रद्द होने की स्थिति में वह 12वीं पास कर जाते। कॉलेज के प्राचार्य दिनेश प्रसाद ने कहा कि 2019 में हेमंत सोरेन सरकार बनने के बाद शिक्षा मंत्री बनाए गए जगन्नाथ महतो की शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक पास थी उस समय उनकी शिक्षा को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए रहे थे इसे देखते हुए मैट्रिक पास शिक्षा मंत्री और स्मारक इंटर महाविद्यालय नवादा में इंटर में अपना नाम कराया इंटर कॉलेज पहुंचे थे और इंटरमीडिएट के नमक्कल कराने के लिए शुल्क के रूप में 11 सो रुपए जमा कर रचित कटवाई थी दाखिला देते वक्त मंत्री ने कहा था कि पढ़ाई की कोई उम्र सीमा नहीं होती है उन्हें आगे नहीं पढ़ पाने की कसक थी अब तक दूर रहेगी।

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