चिकित्सकों के निशाने पर केरल सरकार, बोले- धार्मिक कारणों से न दें ढील
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देश में कोरोना वायरस की रफ्तार धीमी पड़ी है लेकिन कई राज्यों में अब भी अधिक नए केस आ रहे हैं. केरल भी इन्हीं राज्यों में से एक है. केरल सरकार ने बकरीद को देखते हुए कोरोना के कारण लागू प्रतिबंधों में 18 से 20 जुलाई तक ढील देने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री पी विजयन के नेतृत्व वाली केरल की सरकार कोर्ट के साथ ही अब चिकित्सक बिरादरी के भी निशाने पर आ गई है.

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को आजतक से खास बातचीत में कहा कि केरल में कोरोना के मामलों में फिर से वृद्धि देखी जा रही है. लोगों को यह बताना चाहता हूं कि एकबार जब संक्रमण दर कम हो जाए, आप पूरे उत्साह के साथ जश्न मना सकते हैं लेकिन इसके लिए यह समय नहीं है.

डॉक्टर गुलेरिया ने कहा कि भारत को त्योहार मनाते समय धैर्य रखना चाहिए. उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि हाई पॉजिटिविटी रेट वाले किसी भी राज्य को धार्मिक कारणों से पाबंदियां नहीं हटानी चाहिए. कहीं भी बड़ी तादाद में लोगों को एकत्रित होने देने के लिए पाबंदियां हटाने से बचना चाहिए. इस तरह के किसी भी आयोजन से कोरोना के मामले बढ़ेंगे और इससे स्वास्थ्य सेवा पर भार पड़ेगा.

ऐसे समय में जब यूपी समेत कई राज्यों की सरकार ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी है, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने भी केरल सरकार के कदम की निंदा की है. कोरोना को लेकर भारत सरकार की टास्क फोर्स के एक सदस्य ने भी यह कहा था कि मई से पाबंदियां हटाए जाने के बाद मोबिलिटी बढ़ी है जिसकी वजह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मसले पर केरल सरकार से ढील देने के कारण स्पष्ट करने को कहा है.

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