राजस्थान : "ब्लैक फंगस" कोरोना से ज्यादा घातक

राजस्थान : "ब्लैक फंगस" कोरोना से ज्यादा घातक

जयपुर. प्रदेश में हालांकि कोरोना संक्रमण की दर धीरे- धीरे कम होती जा रही है। लेकिन इसी बीच आंकड़े बता रहे है कि अभी कोविड से ज्यादा म्यूकोर्मिकोसिस यानी "ब्लैक फंगस" लोगों के लिए घातक हो रहा है। आपको बता दें कि राज्य में अब तक ऐसे 1,524 मामले सामने आए है, जिसमें म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस के आए है, जिनके कारण 74 लोगों की मौत हो चुकी है।

राज्य में म्यूकोर्मिकोसिस की मृत्यु दर कोविड -19 की पांच गुना है। ताजा अपडेट के अनुसार कोविड मृत्यु दर अब 1 प्रतिशत से भी कम है। वहीं म्यूकोर्मिकोसिस के लिए मृत्यु दर 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। जानकारों का कहना है कि प्रदेश में लगातार बढ़ते ब्लैक फंगस केसेज डॉक्टरों को भी हैरान कर रखा है, लिहाजा चिकित्सक लोगों से अपील कर रहे है, ब्लैक फंगस से जुड़े लक्ष्णों पाये जाने पर जल्द से जल्द उसका उपचार की प्रक्रिया अपनाएं।

सबसे ज्यादा मौते जयपुर में, दवाईयों का हो रहा टोटा

मिली जानकारी के अनुसार ब्लैक फंगर से बढ़ते केसेज के कारण अब राज्य म्यूकोर्मिकोसिस के इलाज के लिए उपयोग में आने वाली दवा (लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी) की कमी का सामना कर रहा है। कई डॉक्टर इलाज के लिए अन्य एंटीफंगल दवाओं का उपयोग करने के लिए मजबूर हैं। बता दें कि ब्लैक फंगस से सबसे ज्यादा मौतें जयपुर में हुई हैं। शहर में म्यूकोर्मिकोसिस से 30 लोगों की जान चली गई, जबकि उदयपुर में 12 लोगों की और जोधपुर में 10 लोगों की मौत फंगस से हुई। कोटा में आठ, बीकानेर में छह, अजमेर, चित्तौड़गढ़ और श्रीगंगानगर में दो-दो और झालावाड़ और भीलवाड़ा में एक-एक मौत हुई है।

कुल 1524 म्यूकोर्मिकोसिस संक्रमित

मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान में अब तक 1,524 लोग म्यूकोर्मिकोसिस से संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से जयपुर के 988 मामले हैं। डॉक्टरों का कहना है डायबिटिज वाले ज्याादत्तर मरीज म्यूकोर्मिकोसिस की चपेट में आ रहे हैं, लिहाजा ऐसे पेशेंट्स को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। उनका कहना है कि स्टेरॉयड लेने वाले मधुमेह रोगियों में इसका संक्रमण अधिक होता है, लेकिन समय पर इलाज मिलने से इससे बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टीओआई को बताया कि

राज्य के 32 अस्पतालों को म्यूकोर्मिकोसिस रोगियों के इलाज की अनुमति दी गई है। लेकिन जरूरी है कि लोग लक्षण दिखते ही इसका इलाज शुरू करवाएं।

Share this story