प्रकृति का मत करो शोषण
प्रकृति का मत करो शोषण

विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ  से हुई थी। पर्यावरण दिवस की शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी। इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था।।जिसमें भारत की ओर से तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था।इस सम्मेलन के दौरान ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम  की भी नींव पड़ी थी।जिसके चलते हर साल विश्व पर्यावरण दिवस आयोजन का संकल्प लिया गया।विश्व पर्यावरण दिवस मनाए जाने से पहले हर साल के लिए एक थीम का चयन किया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम 'पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली (Ecosystem Restoration ) है। जंगलों को नया जीवन देकर, पेड़-पौधे लगाकर, बारिश के पानी को संरक्षित करके और तालाबों के निर्माण करने से हम पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से रिस्टोर कर सकते हैं। लेकिन यूपी के उन्नाव जनपद में वन विभाग के जिम्मेदार हरे पेड़ों की कटाई करके यह संदेश देना चाह रहे है कि अगर वर्दी और पावर हो तो कुछ भी किया जा सकता है। इस वीभत्स महामारी में सबसे ज्यादा मौते ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हुई है। लोगो को ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भटकना पड़ा जब  प्रकृति से छेड़छाड़ की जाएगी तो आपको इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा ।

वही उन्नाव जनपद में कई क्षेत्रो में हरे पेड़ो  की कटाई हो रही है जब इसकी  शिकायत विभाग के जिम्मेदार अफसरों से की जाती है वह जाँच करवाने के नाम पर ठंडे बस्ते में डालकर मामले को रफा दफा करने में लगे हुए है। अब तो वक्त बताएगा डीएफओ क्या कार्यवाही करती है।

 योगेंद्र गौतम
  नगर सवांददाता, उन्नाव

Share this story