HC विदेशी जमातियों के मामले सरकारी वकीलों की लापरवाही पर सख्त, जांच के आदेश

HC विदेशी जमातियों के मामले सरकारी वकीलों की लापरवाही पर सख्त, जांच के आदेश
प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी में पिछले साल महीनों जेल में बंद रहे विदेशी जमातियों (Foreign Jamatis) के मामले में सरकारी वकीलों (Public Prosecutors) के रवैये पर सख्त नाराजगी जतायी है. कोर्ट ने हाईकोर्ट में यूपी सरकार का कामकाज देखने वाले सरकारी वकीलों द्वारा पुलिस अफसरों को समय पर सही जानकारी मुहैया न कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को वकीलों की लापरवाही मामले में जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने प्रमुख सचिव न्याय को जांच में यह पता लगाने का आदेश दिया है कि यह लापरवाही का मामला है या फिर जानबूझकर गलती की गई है. कोर्ट ने प्रमुख सचिव न्याय को सच्चाई का पता लगाकर दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है.

अदालत ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस तरह का रवैया लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन करने वाला होता है. वकील की लापरवाही की वजह से कई पुलिस अफसरों को उनकी किसी गलती के बिना कोर्ट में तलब करना पड़ा था. इतना ही नहीं यह गलती सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करने में भी रुकावट बनी. कोर्ट ने कहा कि 8 जून को जब पुलिस अफसरों से हलफनामा मांगा गया तो सरकारी वकील कोर्ट में ही मौजूद थे. इसके बावजूद अधिकारियों तक को सही जानकारी न देना गलत है. पुलिस अफसरों के हलफनामे में यह कहा गया कि उन्हें अदालत के आदेश के बारे में सही समय पर जानकारी नहीं दी गई. इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है. जस्टिस अजय भनोट की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई हुई. कोर्ट ने 28 जुलाई को दोपहर 2 बजे फिर से इस मामले में सुनवाई का आदेश दिया है.

इन जिलों के एसपी को कोर्ट में होना था पेश
गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट ने पिछली सुनवाई में 3 जिलों के एसपी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा था. 15 जुलाई को मामले की सुनवाई होनी थी. जिसमें हापुड़, शाहजहांपुर और मऊ जिलों के पुलिस कप्तानों को पेश होना था. पुलिस कप्तानों को यह बताना था कि जमातियों के मामले में कोर्ट में अब तक चार्जशीट की कॉपी और केस डायरी क्यों पेश नहीं की गई? मऊ जिले के एसपी को यह भी बताना था कि जमातियों के ख़िलाफ़ IPC की धारा 307 क्यों लगाई गई?

ये है पूरा मामला
दरअसल, पिछले साल मार्च महीने में नई दिल्ली में हुई मरकज़ में विदेशी और भारतीय जमाती शामिल हुए थे. शाहजहांपुर और हापुड़ जिले में जेल में रह चुके विदेशी जमातियों के खिलाफ महामारी एक्ट और फारनर्स एक्ट के साथ ही आईपीसी की धाराओं में भी केस दर्ज हुआ था. जमातियों ने पुलिस चार्जशीट को चुनौती देते हुए केस रद्द किए जाने की अपील की थी. थाईलैंड के रहने वाले 18 विदेशी जमातियों से मामला जुड़ा हुआ है. शाहजहांपुर और हापुड़ में पिछले साल नौ- नौ थाइलैंडी जमाती गिरफ्तार हुए थे. इसके अलावा दो जिलों में भारतीय जमातियों से भी मामला जुड़ा हुआ है. मऊ जिले से जुड़े मामले में कोई विदेशी जमाती नहीं है. विदेशी और भारतीय जमातियों की तरफ से दाखिल अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सुनवाई कर रही है.

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