रेल की पटरी में जंजीर से बांधकर धारदार हथियारों से की गई थी दलित प्रधान की हत्या

रेल की पटरी में जंजीर से बांधकर धारदार हथियारों से की गई थी दलित प्रधान की हत्या
उन्नाव ।
 विगत 22 जनवरी को लखनऊ से प्रकाशित हिंदी दैनिक अखबार के पत्रकार/ब्यूरो पर बिहार थाना अंतर्गत ग्राम बैजुआमऊ में ग्राम प्रधान गंगाराम के हत्यारोपी के लड़के ने मामला दोबारा खुलने के डर से अपने रिस्तेदारो व साथियों संग पत्रकार के मोती नगर स्थित कार्यालय में हत्या करने की नीयत से हमला बोला था जिसमे बाल बाल बचे पत्रकार को गंभीर चोटें आई थी। पुलिस ने पीड़ित पत्रकार को जिला अस्पताल में त्वरित उपचार कराते हुए जांच कर आई0 पी0 सी0 307, 308 व अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर नामजद आरोपियो में 3 को गिरफ्तार कर लिया किन्तु 2016 में बैजुआमऊ के दलित प्रधान हत्याकांड की तरह कोतवाली पुलिस द्वारा हमलावरों को  राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण 23 जनवरी को 151 में चालान कर छोड़ दिया गया।
पत्रकार पर हुए हमले की तरह ही 2016 में  दलित प्रधान हत्याकांड के प्रमुख हत्यारोपी कोटेदार दिनेश चौधरी व अन्य भी 27/04/2016 को मु0आ0स0 0074/2016 आई0पी0सी0 302, 506, 3(2)V में दर्ज होने के बावजूद आज तक राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होने की वजह से पुलिस तथा कानून व्यवस्था का उपहास उड़ाते हुए खुलेआम घूम रहे है।

जानकारी के अनुसार 2016 में रेप तथा हत्या के आरोप में जेल में सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर भगवंतनगर से विधायक थे तथा उनके छोटे भाई स्व0 मनोज सेंगर का उनके कोल्ड स्टोरेज से संचालित आटा पैकिंग का प्लांट था, जिले के अन्य कोटेदारो की तरह बैजुआमऊ का कोटेदार/हत्यारोपी दिनेश चौधरी पर विधायक का वृहद हस्त था। बैजुआमऊ का दलित प्रधान गंगाराम ने कोटेदार द्वारा की जा रही अनिमितताओं, घटतौली  तथा भ्रस्टाचार से तंग आकर प्रशासन में शिकायत की, शिकायत पर उन्नाव प्रशासन ने कोटा निरस्त करते हुए कार्यवाही की। साथ ही पुलिस अधीक्षक उन्नाव को 23/10/2015 को प्रेषित पत्र में उन्नाव रायबरेली हाईवे की बेशकीमती जमीन के मामले में प्रताड़ित किये जाने के साथ म0 उच्च न्यायालय में रिट स0 6004/13 एम बी को उठाने का हत्यारोपियों द्वारा दबाव बनाते हुए जान में मारने की धमकी के साथ खुद की हत्या की भी आशंका जाहिर की थी तथा हत्या हो जाने पर कोटेदार दिनेश चौधरी व अन्य को जिम्मेवार माने जाने की बात की थी। दलित प्रधान अपनी हत्या की पुलिस प्रशासन से बार बार असंका जताता रहा आखिरकार कोटेदार ने राजनैतिक संरक्षण के बल पर कुछ दिनों बाद रावतपुर रेलवे स्टेशन के आगे रेल पटरी से दलित प्रधान गंगाराम को लोहे की जंजीर से बांध कर धारदार हथियारों से काट कर मौत के घाट उतार दिया गया। किन्तु उक्त जघन्य हत्याकांड के प्रमुख हत्यारोपी दिनेश चौधरी व अन्य पर कोई कार्यवाही नही की गई।
मृतक दलित प्रधान गंगाराम की विधवा को हत्यारोपियों ने प्रताड़ित करते हुए उसके 2 बेटो को भी खतरा जाहिर करते हुए बैजुआमऊ से अपने घर को छोड़ने पर मजबूर कर दिया, वर्तमान में गंगाराम की विधवा शुसीला अपने दोने पुत्रो को हत्यारोपी दिनेश चौधरी से बचने की खातिर दर दर भटकने को मजबूर है।
दलित गंगाराम हत्याकांड की विवेचना को दबता हुए देख शुशीला 22/01/2021 को पुलिस अधीक्षक उन्नाव से उक्त मुकदमे में शिकायत लेकर पहुंची थी बाद में वह कचहरी होते हुए मोती नगर स्थित अखबार के कार्यालय पहुंची जहां पहले से पीछा कर रहे हत्यारोपी दिनेश चौधरी का लड़का प्रवीण कुमार अपने रिश्तेदार शिवेंद्र सिंह, भूपेंद्र वर्मा, शुभांशु वर्मा, साथी शीलू जैसवाल, सचिन आदि 15 से बीस लोगो ने पत्रकार पर जानलेवा हमला बोल दिया।
विश्वस्त सूत्रों से जानकारी के अनुसार पत्रकार पर हुए हमले की संरचना विधायक के हिंदुस्तान अखबार से निष्काषित गुर्गे ने किया था, ये वही कथित निष्काषित पत्रकार है जिसे कुलदीप सेंगर मामले में सी बी आई ने पूछताछ के लिए बुलाया था, हमलावरों तथा उक्त गुर्गे की मोबाइल काल डिटेल से प्रमाणित हो जाएगा। इन दिनों उक्त अखबार से निष्काषित गुर्गा दलित गंगाराम हत्याकांड की तरह क्षेत्रीय राजनेता से पुलिस पर मुकदमा खत्म करने का दबाव बनाते हुए हत्याकांड को दोबारा उजागर करने वाले पत्रकार की हमलावरों द्वारा हत्या कराने की योजना बना रहा है। सूत्रों के अनुसार कुलदीप सेंगर के जेल जाने के बाद हिंदुस्तान अखबार से निष्काषित गुर्गा अपनी टीम को संरक्षित करने में लगा है, इसी क्रम में हत्यारोपी कोटेदार  दिनेश चौधरी के मामले को दबाने के षड्यंत्र में पत्रकार पर हमला करवाया।
दलित प्रधान हत्याकांड के आरोपियो की तरह  उक्त हत्याकांड को उजागर करने वाले पत्रकार के हमलावर भी योगी राज तथा कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे है।
स्थानीय राजनेता ने हमलारो को छोड़ने के दिये थे निर्देश
उन्नाव। दलित प्रधान हत्याकांड को उजागर करने वाले पत्रकार के हमलावरों को पुलिस ने जांच के बाद गिरफ्तार किया किन्तु विश्वस्त सूत्रों के अनुसार पुलिस पर हमलावरों को तत्काल छोड़ने तथा फ़र्ज़ी क्रोस मुकदमा लिखने का आदेश दिया गया, जिसे मौजूदा अधिकारी ने सिरे से इनकार कर दिया था।
निष्काषित गुर्गे ने माननीय द्वारा पुलिस पर दबाव बनाकर दलित गंगाराम हत्याकांड की तरह इतिहास दोहराते हुए हमलावरों से एक और हत्याकांड की संरचना में अग्रसर है।
 

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