कहां गया सरकार का नारा "पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया"
कहां गया सरकार का नारा "पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया"

रिपोर्ट अभिमन्यु शुक्ला जिला ब्यूरो औरैया
दिनांक-11-06-2021
स्थान- इटावा उत्तर प्रदेश

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत के नौजवानों के लिए एक नारा दिया था और अपील भी की थी ,कि भारत का हर एक नागरिक पढ़ाई करेगा और पढ़ाई के साथ-साथ एक नारा दिया था "पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया" लेकिन इस नारे का कोई भी असर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। आज भी भारत में बेरोजगारी इतनी हो गई है कि नौजवान अब शिक्षा से दूर अपना कारोबार कर रहे हैं, इस कारोबार में अब वह बच्चे भी आ गए हैं, जिनके हाथ में कलम और किताब होनी चाहिए थी, उन बच्चों के हाथों में सब्जी का ठेला और गुब्बारे नज़र आ रहे हैं।ऐसा ही नजारा इटावा में जगह-जगह पर दिख रहा है,जहां एक छोटा बच्चा अपने परिवार का पेट पालने के लिए प्लास्टिक के गुब्बारे बेचता हुआ दिखाई दिया तो दूसरी तरफ दो नाबालिग बच्चे सड़कों पर सब्जियां बेचते हुए दिखाई दिए। नाबालिक बच्चे सब्जियां और प्लास्टिक की बॉल बेचकर अपने घर का गुजारा चला रहे हैं, यह बच्चे शिक्षा से कोसों दूर हैं, शिक्षा क्या होती है, इन बच्चों को कुछ नहीं पता,पढ़ लिख कर बच्चे क्या बनते हैं, इन बच्चों को कुछ नहीं पता, इन बच्चों की किस्मत में बस जगह-जगह जाकर सब्जियां और गुब्बारे बेचना रह गया है।


दो वक्त का घर का गुजारा चलाने के लिए बच्चो के हाथ में दिखा सब्जी का ठेला और गुब्बारे


योगी सरकार लगातार विद्यालयों का सुंदरीकरण कर रही है, बच्चों के पढ़ने को लेकर तरह तरह के कार्यक्रम किए जा रहे हैं, लेकिन आज भी बच्चे शिक्षा से कोसों दूर होते हुए दिखाई दे रहे हैं। हम बात कर रहे हैं जनपद इटावा की, जहां नौजवान के साथ-साथ नाबालिक बच्चे भी शिक्षा से दूर होते दिखाई दे रहे हैं जिन हाथों में कॉपी और कलम होनी चाहिए थी उन हाथों में एक डंडा और कई प्लास्टिक के गुब्बारे दिख रहे हैं। अजीम नाम का यह बालक दिन भर जगह-जगह भटक कर दो पैसे कमाना चाहता है।अजीम ने बताया कि लॉकडाउन में हमारी हालत भुखमरी की कगार पर आ गई थी ,क्योंकि कमाने वाला बस मैं अकेला था, ऐसे में प्रशासन ने भी हमारी कोई मदद नहीं की और जब लॉक डाउन खुला तो आज भी हालत बद से बदतर होती हुई दिखाई दे रही है। अजीम के घर में एक मां है और वह घर-घर जाकर लोगों के झूठे बर्तन धोती है। लेकिन इतने में घर का गुजारा करना बहुत मुश्किल होता है। वहीं दूसरी तस्वीर दो नाबालिक बच्चों की दिखाई दी जहां पर दो बच्चे जो परिवार का गुजारा चलाने के लिए सब्जी का ठेला लेकर दर-दर भटक रहे हैं और सब्जियां बेच रहे हैं, लेकिन इन बच्चों पर प्रशासन को बिल्कुल तरस नहीं आ रहा है। प्रशासन इन बच्चों की तरफ कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है। जो सरकार लगातार बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने की बात करती है। आज वह सरकार इन नाबालिक बच्चों से कोसों दूर होती हुई दिखाई दे रही है ।इन बच्चों का भविष्य खतरे में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। इन बच्चों का भविष्य बनाने का जिम्मा सरकार का है ।लेकिन सरकार चुनाव के टाइम पर तो नौजवानों का भविष्य बनाने की लाख वादे करती है ,लेकिन चुनाव जीतने के बाद सरकारें सब भूल जातीं हैं।

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